Nothing in this Sanhita shall be deemed to limit or affect the inherent powers of the High Court to make such orders as may be necessary to give effect to any order under this Sanhita, or to prevent abuse of the process of any Court or otherwise to secure the ends of justice.
यह धारा उच्च न्यायालय की स्वाभाविक शक्तियों को संरक्षित करती है ताकि वह न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक आदेश जारी कर सके। यह धारा एक प्रक्रियात्मक प्रावधान है और दंडात्मक दंड का प्रावधान नहीं करती है। यह उच्च न्यायालय को प्रभावी ढंग से कानूनी कार्यवाही की देखरेख करने की अनुमति देता है।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS)
धारा 528
Saving of inherent powers of High Court
Statutory Content of Section 528
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धारा 528 का क्या अर्थ है?
यह धारा उच्च न्यायालय को यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक आदेश जारी करने की अनुमति देती है कि न्याय सुनिश्चित किया जाए। यह उच्च न्यायालय की स्वाभाविक शक्तियों को संरक्षित करती है, जो कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग रोकने या न्याय के उद्देश्यों को सुरक्षित करने के लिए आवश्यक हो सकती है।
- •उच्च न्यायालय के पास स्वाभाविक शक्तियां होनी चाहिए
- •आदेश भारतीय नगरिक सुरक्षा संहिता के तहत किसी भी आदेश को प्रभावी बनाने या किसी भी न्यायालय की प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए आवश्यक होना चाहिए
व्यावहारिक उदाहरण (Practical Example)
उदाहरण के लिए, यदि रमेश भारतीय नगरिक सुरक्षा संहिता के तहत एक याचिका दायर करता है और निचली अदालत का निर्णय अन्यायपूर्ण लगता है, तो उच्च न्यायालय अपनी स्वाभाविक शक्तियों का उपयोग करके न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक आदेश जारी कर सकता है, जैसे कि पुन: परीक्षण का आदेश देना या याचिका खारिज करना।
धारा 528 से जुड़े सामान्य प्रश्न
Q: भारतीय नगरिक सुरक्षा संहिता की धारा 528 के तहत दंड या परिणाम क्या है?
A: यह धारा एक प्रक्रियात्मक प्रावधान है और दंडात्मक दंड का प्रावधान नहीं करती है।
Q: क्या यह धारा निजी व्यक्तियों या सार्वजनिक संस्थाओं पर लागू होती है?
A: यह धारा भारतीय नगरिक सुरक्षा संहिता के तहत किसी भी कार्यवाही में उच्च न्यायालय की शक्तियों से संबंधित है, जिसमें निजी व्यक्ति और सार्वजनिक संस्थाएं दोनों शामिल हो सकते हैं।
Q: क्या यह धारा जमानती या संज्ञेय है?
A: यह धारा अपराधों से संबंधित नहीं है, इसलिए यह न तो जमानती है और न ही संज्ञेय; यह उच्च न्यायालय की शक्तियों से संबंधित एक प्रक्रियात्मक प्रावधान है।