The State shall not deny to any person equality before the law or the equal protection of the laws within the territory of India.
यह धारा भारतीय संविधान की धारा १४ के तहत है जो सभी को समान रूप से कानून के तहत और समान संरक्षण के अधिकार के साथ उपचार करती है। यह धारा एक प्रक्रियात्मक प्रावधान है और दंडात्मक दंड नहीं निर्धारित करती है। यह पुराने भारत सरकार अधिनियम, १९३५ के समानता के सिद्धांत की जगह लेती है।
भारत का संविधान
धारा 14
Equality before law
Statutory Content of Section 14
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धारा 14 का क्या अर्थ है?
यह धारा भारतीय संविधान की एक महत्वपूर्ण धारा है जो सभी को समान रूप से कानून के तहत और समान संरक्षण के अधिकार के साथ उपचार करती है। यह धारा यह सुनिश्चित करती है कि सरकार किसी भी व्यक्ति के प्रति पक्षपात नहीं करती है और सभी को समान रूप से कानून के तहत उपचार मिलता है। यह धारा भारतीय नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण प्रावधान है।
- •राज्य को किसी व्यक्ति को कानून के सामने समानता से वंचित नहीं करना चाहिए।
- •राज्य को किसी व्यक्ति को भारत के क्षेत्र में कानून के संरक्षण के समान संरक्षण से वंचित नहीं करना चाहिए।
व्यावहारिक उदाहरण (Practical Example)
राजेश, एक हिंदू, और प्रिया, एक मुस्लिम, दोनों एक ही अपराध के लिए गिरफ्तार किए जाते हैं। धारा १४ के तहत, सरकार को उन्हें समान रूप से और पक्षपात के बिना उपचार करना चाहिए। अदालत को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कानून दोनों राजेश और प्रिया के लिए समान रूप से लागू हो और उन्हें समान संरक्षण के अधिकार मिले।
धारा 14 से जुड़े सामान्य प्रश्न
Q: धारा १४ के तहत दंड या परिणाम क्या है?
A: यह धारा एक प्रक्रियात्मक प्रावधान है और दंडात्मक दंड नहीं निर्धारित करती है।
Q: क्या यह धारा निजी व्यक्तियों या सार्वजनिक संस्थाओं पर लागू होती है?
A: यह धारा सार्वजनिक संस्थाओं पर लागू होती है, जिसमें सरकार और उसकी एजेंसियां शामिल हैं।
Q: धारा १४ के तहत अपराध बailable या cognizable है?
A: यह धारा एक प्रक्रियात्मक प्रावधान है और दंडात्मक दंड नहीं निर्धारित करती है, इसलिए यह बailable या cognizable अपराधों पर लागू नहीं होती है।